नीमच | जब हाथों में चूड़ियों की खनक के साथ लाठियों की गूंज सुनाई दे, और मासूम चेहरों पर डर की जगह 'आत्मविश्वास' की चमक दिखे, तो समझ लीजिए कि समाज बदल रहा है। भारत विकास परिषद, शाखा नीमच ने इसी बदलाव की इबारत लिखी है अपने तीन दिवसीय 'आत्मरक्षा एवं खेलकूद शिविर' के जरिए।
🔥 मैदान पर जब उतरीं 'कल की वीरांगनाएं'
8 मई से शुरू हुए इस महाकुंभ में नीमच की 150 से ज्यादा बेटियों ने यह साबित कर दिया कि वे अब केवल संरक्षण की मोहताज नहीं हैं। उज्जैन से आईं मुख्य शिक्षिका श्रीमती पूजा चित्तौड़ा के मार्गदर्शन में इन बेटियों ने सुबह की ओस और शाम की ढलती धूप, दोनों वक्त पसीना बहाया।
टेक्निक: केवल शारीरिक बल नहीं, बल्कि दिमाग से दुश्मन को पछाड़ने के गुर।
शस्त्र:लाठी और तलवार चलाने का वो हुनर, जो इतिहास की वीरांगनाओं की याद दिला दे।
खेल: खेल-खेल में अनुशासन और टीम वर्क का पाठ।
⚔️ आज शाम 'अग्रोहा भवन' बनेगा शक्ति का केंद्र
आज यानी 10 मई, रविवार शाम 5:00 बजे, सीएसवी अग्रोहा भवन एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनेगा। यह सिर्फ एक 'समापन समारोह' नहीं है, बल्कि उन अभिभावकों के लिए गौरव का क्षण है, जिनकी बेटियां आज मंच पर तलवार और लाठी संचालन का लाइव प्रदर्शन करेंगी।
"हमारा उद्देश्य बेटियों को केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें निर्भय बनाना है। टीम भारत विकास परिषद, नीमच
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में परिषद के अध्यक्ष पुरुषोत्तम गुप्ता, सचिव सतीश गोयल और कोषाध्यक्ष संदीप दरक की रणनीति रही, तो वहीं श्रीमती सुनीता चौधरी, हेमा गुप्ता और मीना जायसवाल के नेतृत्व में महिला शक्ति ने मोर्चा संभाला। मनोज माहेश्वरी (मीडिया प्रभारी) के अनुसार, पूरी टीम (श्रीमती सरिता, अनामिका, सुनीता मंगल, उर्मिला जैन व अन्य) ने एक परिवार की तरह इस शिविर को सींचा है।