नीमच | विज्ञान और तकनीक के इस दौर में भी कुछ ऐसी गुत्थियाँ हैं जिन्हें सुलझा पाना आज के 'सिस्टम' के बस की बात नहीं है। नीमच सिटी के जैन मंदिर के समीप स्थित 'घाटी वाले खाकरदेव महाराज' का दरबार आज एक ऐसी ही मिसाल पेश कर रहा है। यहाँ आस्था और विश्वास का वो संगम देखने को मिल रहा है, जिसने बड़े-बड़े दिग्गजों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
महानगरों से 'उम्मीद' लेकर पहुँच रहे श्रद्धालु
आमतौर पर गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोग दिल्ली, मुंबई या पुणे जैसे शहरों का रुख करते हैं, लेकिन यहाँ मामला बिल्कुल उल्टा है। इस 150 साल पुराने प्राचीन स्थान की महिमा सुनकर अब इन महानगरों से लोग नीमच की गलियों में खाकरदेव महाराज के दरबार की तलाश में पहुँच रहे हैं।
क्या है इस 'दिव्य दरबार' का रहस्य?
यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं और पुजारी पवन तंवर के मुताबिक, दरबार में उन बीमारियों का भी 'निवारण' हो रहा है जहाँ मेडिकल साइंस हाथ खड़े कर देती है:
गांठ और गुदड़े (Tumors): शरीर में होने वाली किसी भी प्रकार की गांठ के बिना किसी चीरे-टांके के गलने का दावा किया जा रहा है।
संतान सुख की प्राप्ति: सालों से सूनी गोद भरने की आस लेकर आने वाली महिलाओं को यहाँ से नई उम्मीद मिल रही है।
असाध्य शारीरिक कष्ट: महिलाओं की गुप्त बीमारियां और पुराने शारीरिक दर्द में यहाँ की मिट्टी और अखंड जोत का चमत्कार देखने को मिल रहा है।
आज के युग में 'अजूबा': न फीस, न चढ़ावा!
इस स्थान की सबसे बड़ी खासियत जो इसे सबसे अलग बनाती है, वो है यहाँ की 'निःशुल्क सेवा'। जहाँ आज मामूली इलाज के लिए लाखों का बिल बनता है, वहीं खाकरदेव महाराज के दरबार में एक रुपया भी नहीं लिया जाता। पुजारी का कहना है कि वे केवल एक माध्यम हैं और यह सब उदयपुर (वीरपुरा घातोड़ जी) से आई अखंड जोत और शेषनाग महाराज की कृपा है।
मिशन मालवा न्यूज़ की विशेष टिप्पणी
यह रिपोर्ट स्थानीय मान्यताओं और श्रद्धालुओं के अनुभवों पर आधारित है। मिशन मालवा न्यूज़ अंधविश्वास का समर्थन नहीं करता, लेकिन हम उस जन-सेवा और निस्वार्थ आस्था को सलाम करते हैं जो हजारों निराश चेहरों पर मुस्कान ला रही है।
Note:यह खबर पूरी तरह से वीडियो साक्षात्कार में दिए गए दावों पर आधारित है। चिकित्सा संबंधी समस्याओं के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर की राय भी महत्वपूर्ण है।
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