मनासा | क्या बेटियां सिर्फ घर चलाती हैं? जी नहीं! मनासा में पिछले 5 दिनों से चल रहे कन्या कौशल शिविर ने इस सोच को जड़ से उखाड़ फेंका है। अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित इस आवासीय शिविर में बेटियों ने वह सीखा, जो आज के दौर में बड़े-बड़े डिग्रीधारी भी नहीं सीख पाते।
शिविर या 'शक्ति की पाठशाला'?
5 मई से शुरू हुआ यह शिविर आज पुरस्कार वितरण के साथ संपन्न हुआ। 10 गांवों से आई 54 शेरनियों ने गायत्री शक्तिपीठ पर रहकर साधना, यज्ञ और योग तो सीखा ही, साथ ही 'पर्सनालिटी डेवलपमेंट' का ऐसा पाठ पढ़ा कि अब वे अपने गांवों में नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। सुश्री निशा धनोतिया और पवन गुप्ता की टीम ने इन बेटियों को संस्कार और संस्कृति की वह 'घुट्टी' पिलाई है, जो इन्हें जीवन के हर मोड़ पर जीत दिलाएगी।
मंच पर जब मिला सम्मान, चमक उठीं आंखें
रविवार को जब पुरस्कारों की बौछार हुई, तो माहौल देखने लायक था। मुख्य अतिथि मोहन गुर्जर (जनपद उपाध्यक्ष), समाजसेवी सुरेश धनगर और प्राचार्य हेमंत श्रीवास्तव ने जब बेटियों को सर्टिफिकेट और मेडल दिए, तो पूरा हॉल तालियों से गूंज उठा। गायत्री परिवार के ईश्वरलाल फरक्या और जसवंत सिंह राठौर ने बेटियों को मंत्र दिया कि वे अब रुकेंगी नहीं, बल्कि समाज को रास्ता दिखाएंगी।
मिशन अभी बाकी है: गांव-गांव बनेगी 'टोली'
खबर यहीं खत्म नहीं होती! ये 54 बेटियां अब अपने गांवों में जाकर 'साप्ताहिक समूह साधना' शुरू करेंगी। यानी गायत्री परिवार की यह मशाल अब हर घर तक पहुंचेगी। ट्रस्टी महेश धनोतिया और बंशीलाल कछावा ने उन अभिभावकों का भी तिलक लगाकर सम्मान किया, जिन्होंने अपनी बेटियों को इस नेक कार्य के लिए भेजा।
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ब्यूरो रिपोर्ट: चिराग फगवार (मिशन मालवा न्यूज़)
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