नयागांव/नीमच: मध्य प्रदेश के परिवहन गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा है—**आरटीओ चेक पोस्ट** की वापसी। माननीय हाई कोर्ट के आदेश के बाद, नयागांव बॉर्डर सहित प्रदेश की अन्य बंद पड़ी चेक पोस्ट को फिर से शुरू करने की तैयारी है। लेकिन इस आदेश के साथ ही एक कड़वा सवाल भी उठ खड़ा हुआ है: क्या व्यवस्था बदलने से जमीनी हकीकत बदलेगी? पड़ताल: जब ताले लगे थे, तब भी 'रास्ते' खुले थे? क्षेत्र में चर्चा है कि जुलाई 2024 में जब भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद इन **बैरियरों और चेक पोस्ट** को बंद किया गया था, तब भी परिवहन व्यवस्था पूरी तरह 'पारदर्शी' नहीं हो पाई थी। ट्रक ड्राइवरों और स्थानीय सूत्रों की मानें तो चेक पोस्ट बंद होने के बावजूद 'उड़नदस्तों' और चेकिंग के नाम पर 'अवैध वसूली' की खबरें लगातार आती रहीं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब चेक पोस्ट बंद थीं तब भी सिस्टम 'लीक' था, तो अब दोबारा शुरू होने पर क्या गारंटी है कि पुराने ढर्रे की वापसी नहीं होगी?
### **साख बचाने की बड़ी चुनौती:**
अब जब प्रशासन इन **चेक पोस्ट** को दोबारा संचालित करेगा, तो विभाग के सामने अपनी छवि को सुधारने की सबसे बड़ी चुनौती होगी। भोपाल से लेकर नीमच तक 'मलाईदार पोस्टिंग' की चर्चाओं के बीच, क्या ईमानदार अधिकारियों की तैनाती होगी? जनता पूछ रही है कि क्या इस बार आरटीओ चेक पोस्ट सिर्फ 'राजस्व' का केंद्र बनेंगी या फिर भ्रष्टाचार मुक्त परिवहन का नया उदाहरण पेश करेंगी?
### **मिशन मालवा न्यूज़ का तीखा सवाल:**
मुख्यमंत्री जी की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और हाई कोर्ट के आदेश के बीच क्या विभाग एक ऐसा पारदर्शी सिस्टम ला पाएगा जिससे ट्रक चालकों को राहत मिले? या फिर 'अवैध वसूली' का जो खेल अब तक पर्दे के पीछे से चल रहा था, उसे अब **नई चेक पोस्ट** के रूप में नया ठिकाना मिल जाएगा? मिशन मालवा न्यूज़ इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।