भोपाल/जबलपुर: जबलपुर के बरगी बांध में हुई क्रूज दुर्घटना, जिसने कई परिवारों को उम्र भर का गम दे दिया है, अब सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर रही है। महज़ औपचारिक खानापूर्ति के बजाय, मध्य प्रदेश शासन ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए **न्यायिक जांच* का ऐलान कर दिया है।
**वरिष्ठ न्यायमूर्ति करेंगे दूध का दूध और पानी का पानी**
सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त **न्यायमूर्ति श्री संजय द्विवेदी** इस पूरे घटनाक्रम की बारीकी से जांच करेंगे। यह केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान है।
### **जांच के घेरे में 'सिस्टम': ये 5 सवाल खोलेंगे राज**
वरिष्ठ पत्रकारिता के नजरिए से देखें तो आयोग के पास जो 5 बिंदु हैं, वे सीधे तौर पर सिस्टम की लापरवाही की ओर इशारा करते हैं:
1. **उत्तरदायित्व का निर्धारण:** क्या क्रूज का संचालन नियमों के तहत था? अगर नहीं, तो किसकी शह पर यह मौत का खेल चल रहा था?
2. **रेस्क्यू ऑपरेशन का सच:** क्या प्रशासन के पास पर्याप्त संसाधन थे, या देरी ने मासूमों की जान ली?
3. **सुरक्षा का महा-ऑडिट:** प्रदेश के सभी जलाशयों में चल रहे जल-क्रीड़ा केंद्रों की सुरक्षा का 'डेथ ऑडिट' होगा।
4. **कागजी नहीं, जमीनी SOP:** 'इनलैंड वेसल्स एक्ट 2021' और 'NDMA गाइडलाइंस' का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ?
5. **त्वरित रिस्पॉन्स टीम:** हर पर्यटन स्थल पर 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' की तैनाती में अब तक देरी क्यों?
### **वक्त कम, सवाल हजार!**
आयोग को **90 दिनों (3 माह)** के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार की मेज पर रखनी है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या इस रिपोर्ट के बाद उन रसूखदारों पर गाज गिरेगी जो सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर व्यापार कर रहे हैं?
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