पालसोड़ा: क्षेत्र के बड़ा मोहल्ला स्थित श्री चारभुजा मंदिर में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री चारभुजा मंदिर समिति के तत्वावधान में आयोजित भगवान श्री शालीग्राम जी महाराज एवं भगवती तुलसी महारानी का पावन विवाह समारोह अत्यंत हर्षोल्लास और वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस दिव्य आयोजन से संपूर्ण क्षेत्र धर्ममय हो गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गणपति स्थापना से हुआ। इसके पश्चात चाक एवं कंकण डोरड़ा की रस्में पूरी की गईं। मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से किसी राजमहल की तरह सजाया गया था। 14 फरवरी, शनिवार को जमुनिया कला स्थित किशोर पंचोली के निवास पर माता तुलसी का भव्य मंडप सजाया गया, जहाँ मंगल कलश और घर-विवाह की सभी रस्में निभाई गईं।
ठाठ-बाट से निकली बिंदोली और बारात
भगवान शालीग्राम जी की भव्य बिंदोली निकाली गई, जिसमें श्रद्धालु बैंड-बाजे की धुन पर जमकर थिरके। जब बारात पालसोड़ा से जमुनिया कला पहुँची, तो वहाँ पुष्पवर्षा और आतिशबाजी के साथ बारातियों का भव्य स्वागत किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान और माता तुलसी के फेरे हुए, जिसे देख उपस्थित भक्त भावविभोर हो उठे।
बहनों को भेंट की गई 'चारभुजानाथ' की तस्वीरें
इस समारोह का मुख्य आकर्षण समिति द्वारा किया गया विशेष वितरण रहा। विवाह उत्सव के दौरान उपस्थित बहनों को भगवान श्री चारभुजानाथ की पावन तस्वीरें वितरित की गईं। उपहार स्वरूप भगवान की छवि पाकर बहनों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने सुख-समृद्धि की कामना की।
* महाप्रसादी: विवाह के पश्चात विशाल प्रीतिभोज का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की।
* सहयोग: मंदिर समिति, स्थानीय युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों ने व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने में सराहनीय योगदान दिया।
* आभार: श्री चारभुजा मंदिर समिति ने सभी सहयोगियों, दानदाताओं और श्रद्धालुओं का हृदय से आभार व्यक्त किया।
> "यह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी अटूट आस्था का प्रतीक है। भगवान शालीग्राम और तुलसी जी का विवाह क्षेत्र में खुशहाली लेकर आए, यही हमारी प्रार्थना है।" — आयोजन समिति