नीमच | जिले में बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ जिला प्रशासन ने एक बार फिर कड़ा प्रहार किया है। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा के 'जीरो टॉलरेंस' निर्देश पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन की टीम ने ग्राम जवासा में होने वाले दो नाबालिग बहनों के विवाह को ऐन वक्त पर रुकवा दिया।
गुप्त सूचना पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन को 28 जनवरी को यह गुप्त सूचना मिली थी कि जवासा ग्राम में 29 जनवरी को दो सगी बहनों का विवाह संपन्न होने जा रहा है। सूचना मिलते ही जिला कार्यक्रम अधिकारी अंकिता पंड्या के मार्गदर्शन और एसडीएम संजीव साहू के पर्यवेक्षण में एक संयुक्त टीम गठित की गई। टीम ने बिना वक्त गंवाए मौके पर दबिश दी और विवाह की तैयारियों के बीच जांच शुरू की।
दस्तावेजों में खुली पोल, राजस्थान की हैं बालिकाएं
प्रशासनिक टीम की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि जिन दो बहनों का विवाह किया जा रहा था, उनकी उम्र मात्र 16 और 17 वर्ष है। जांच में यह भी सामने आया कि बालिकाएं मूलतः राजस्थान की निवासी हैं। जब अधिकारियों ने परिजनों से आयु संबंधी वैध दस्तावेजों की मांग की, तो उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। परिजनों ने स्वीकार किया कि बालिकाओं की आयु विवाह के लिए निर्धारित कानूनी सीमा से कम है।
कानून का पाठ और मौके पर पंचनामा
महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने परिजनों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 की गंभीरता समझाई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है। प्रशासन की सख्ती और समझाइश के बाद, परिजनों ने अपनी गलती मानते हुए लिखित में विवाह स्थगित करने की सहमति दी। मौके पर ही पंचनामा तैयार कर सख्त चेतावनी दी गई।
मिशन मालवा की अपील
बाल विवाह समाज के लिए एक अभिशाप है। यदि आपके आसपास कहीं भी इस तरह का अवैध कृत्य हो रहा है, तो तुरंत जिला प्रशासन या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दें। आपकी एक सजगता किसी मासूम का भविष्य बचा सकती है।