पुलिस की सक्रियता: सुरक्षा से समझौता नहीं
यातायात पुलिस द्वारा चलाया जा रहा वर्तमान अभियान शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय है। पुलिस कप्तान के निर्देशन में टीम चौराहों पर मुस्तैद है और इन प्रमुख बिंदुओं पर कड़ी कार्रवाई कर रही है:* बुलेट के पटाखों पर लगाम: मॉडिफाइड साइलेंसर लगाकर ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली बुलेट को जब्त कर उन पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।
* काली फिल्म और सुरक्षा: रसूखदारों की गाड़ियों से काली फिल्में (Black Film) उतरवाई जा रही हैं। साथ ही, बिना हेलमेट और बिना सीट बेल्ट वाले वाहन चालकों को कानून का पाठ पढ़ाया जा रहा है।
* दस्तावेज जांच: बिना लाइसेंस, बिना बीमा और एक्सपायर हो चुके फिटनेस वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाकर पुलिस यह संदेश दे रही है कि सड़कों पर अवैध तरीके से वाहन चलाना अब महंगा पड़ेगा।
नगर पालिका की लापरवाही: फाइल में अटका समाधान
एक तरफ पुलिस सड़कों को व्यवस्थित करने के लिए पसीना बहा रही है, तो दूसरी तरफ नगर पालिका प्रशासन की सुस्ती ने जनता की मुसीबतें बढ़ा रखी हैं। शहर का सबसे हृदय स्थल माना जाने वाला कमल चौक से 40 चौराहे तक का मार्ग आज अव्यवस्था का केंद्र बना हुआ है।
टेंडर की सुस्ती, जनता को भुगतना पड़ रहा हर्जाना:
नगर पालिका ने इस मार्ग पर पार्किंग व्यवस्था तो अलर्ट की थी, लेकिन विडंबना देखिए कि महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक पार्किंग का टेंडर पास नहीं हुआ है। 1. पार्किंग ठेका न होने के कारण वाहन चालक बेतरतीब तरीके से सड़क पर गाड़ियां खड़ी कर रहे हैं।
2. सड़कों पर खड़े वाहनों की वजह से पूरा ट्रैफिक बाधित होता है और घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है।
3. पुलिस ट्रैफिक साफ करवाती है, लेकिन पार्किंग स्थल न होने के कारण दोबारा वही स्थिति बन जाती है।
मिशन मालवा का तीखा सवाल
नगर पालिका प्रशासन आखिर किस बात का इंतज़ार कर रहा है? जब पुलिस अपनी जिम्मेदारी पूरी मुस्तैदी से निभा रही है, तो नगर पालिका टेंडर प्रक्रिया को लटकाकर शहर को जाम के दलदल में क्यों धकेल रही है? यातायात पुलिस की कार्रवाई तभी सफल होगी जब नगर पालिका अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगी और पार्किंग की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करेगी।