अंता में अकेले पड़े केके धाकड़
नीमच से 220 किमी दूर चाय की टपरी लगाकर पत्नी की प्रताड़ना से परेशान होकर न्याय के लिए लड़ रहे केके धाकड़ इस विवाद में अकेले पड़ गए। नपा के चैयरमेन के पॉवर के आगे टपरी पर बेठे ग्राहक भी बचाव के लिए आगे तक नही आए। मामले में केके धाकड़ ने बताया है कि वो पत्नी से ठगा जाने के बाद अब चाय का धंधा भी नही चला पा रहा है । भाजपा के नपा चैयरमेन की सरेआम गुंडागर्दी से अंता के रहवासी खौफ जदा हैजिस जगह मैं चाय की टपरी लगाता था और किराया देता था, वहां से सुबह तक जगह खाली करने फरमान आ गया है। सुनने में ये भी आया है कि अब अंता में कही भी केके धाकड़ की चाय की टपरी नही लगेगी, क्योंकि भाजपा के नपा चैयरमेन को एक वोट केके की सासुमॉ ने भी दिया है। केके धाकड़ की सासु मॉ अंता में पार्षद पद पर पदस्थ है और उसी का दुरूपयोग कर चैयरमेन से सांठगांठ कर केके की न्याय मांगने की मुहिम को अंता में ही दफन करने की साजिश रची जा रही है। केके धाकड़ को पहले दहेज केस से प्रताड़ित किया गया बाद में हर्जा — खर्चा का भी केस लगा दिया गया। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब केके की पत्नी खुद को दिल्ली में विजा काउंसलर बताती थी और विजा काउंसलर की नौकरी छोड़कर अठाना में मधुमक्खी पालन का कार्य कर खुद को महिला सशक्तिकरण का आधार बता रही थी, तो ऐसे में क्या हुआ कि एक विजा कांउसलर को अब अपने ही पति से दफा 125 के तहत ऐलिमनी मांगनी पड़ रही है, जबकि केके की पत्नी का फैमिली बेग्राउण्ड भी हाल में पता चला है, जिसमें बताया जा रहा है कि केके की सास भाजपा समर्पित अंता क्षेत्र से पार्षद है और केके धाकड़ द्वारा अन्याय के खिलाफ न्याय मांगने की जिस मुहिम ने देशभर में उसे फैमस कर दिया है, जिससे नाराज अंता के कुछ सत्तारूड़ी अब अपना पॉवर इस्तेमाल करके केके धाकड़ को डरा धमका रहे है। केके की न्याय मांगने की इस मुहिम को येन—केन तरीके से बंद करवाना चाहते है।