रतलाम (राहुल बैरागी)
जिले बछोड़िया गांव में नानी बाई रो मायरे की कथा वाचक गायत्री वैष्णव के मुखारविंद से तीन दिवसीय मायरे का आयोजन किया गया । इस दौरान उन्होंने कहा कि पहले हम नरसिंह भगवान की कथा सुनते थे, उसमें महामारी का उल्लेख था. कुछ वर्ष पहले तक हम केवल सुन ही सकते थे कि महामारी जैसी कोई चीज होती है. लेकिन अब हमने कोरोना महामारी को भी देख लिया है. उन्होंने कहा कि हम सबको लगता है कि कथा, सत्संग, भगवान की भक्ति बुढ़ापे में करेंगे, लेकिन यह गलत है. कथा, सत्संग, भगवान की भक्ति युवावस्था में ही करनी चाहिए, बुढ़ापा आने तक इंतजार नहीं करना चाहिए ।वही वैष्णव ने कहा जहां भगवान की भक्ति से नरसी जी की करुणा पुकार से भगवान को हर समय आना पड़ता है। नरसी जी ने अपनी भक्ति भाव से करुना पुकार कर भगवान को रिझाया। बार-बार नरसी जी भगवान से प्रार्थना करते हरी नरसी के लिए आते रहे। नरसी जी की भाव वात्सल्य से पसंद भगवान स्वयं मायरा भरने के लिए नरसी जी के साथ चल देते हैं। इसीलिए हर व्यक्ति को भगवान की भक्ति करना चाहिए। मीरा को लगा भात में कोई नहीं आएगा मीरा को लगता था कि पिता व भाई जिंदा नहीं है तो उसकी बेटी की शादी पर भात लेकर मायके से कोई नहीं आएगा, मगर मीरा अंदाजा गलत साबित हुआ। वजह उसके मायके के गांव वालों ने जो कदम उठाया वो मिसाल बन गया। पूरा गांव मीरा के घर उसका भाई बनकर भात भरने पहुंच गया। जिसने भी यह भात देखा वो यही कहता रहा कि जिस तरह से नानी बाई रो मायरा भरने खुद भगवान श्री कृष्ण आए थे वैसे ही भगवान की भूमिका भी उसी प्रकार नगर वासियों ने मीरा के गांव वालों ने निभाई है। वही मायरे की कथा सुनने के लिए पूरे गांव की महिलाओं पुरूष सहित बच्चे भी रात्रि कथा में पहुचते जहां पर कथा श्रवण करते ओर आरती करके प्रसादी वितरण की गई वही कथा में नानी बाई रो मायरो भराया गया जिसमें ग्रामीणो ने भी बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया गया अंतिम दिन कथा की महाआरती करके महाप्रसादी वितरण की गई ।