नीमच | नगर पालिका परिषद नीमच में एक कर्मचारी की पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक और कानूनी विवाद गहराता नजर आ रहा है। जिला आरटीआई अध्यक्ष विकास यादव (गोलू) ने एक बार फिर शासन और प्रशासन को 'स्मरण पत्र' भेजकर सहायक ग्रेड-III टेकचंद बुनकर के स्थानांतरण मामले में गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला सीधे तौर पर माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के पालन से जुड़ा है।
#### **न्यायालयीन आदेश और वर्तमान स्थिति**
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, टेकचंद बुनकर का स्थानांतरण जून 2025 में शाजापुर किया गया था। इस आदेश के विरुद्ध कर्मचारी ने माननीय उच्च न्यायालय इंदौर की शरण ली थी, जहाँ से उन्हें **WP No. 23694 of 2025** के तहत अंतरिम राहत (स्टे) प्रदान की गई थी।
शिकायतकर्ता विकास यादव का दावा है कि माननीय न्यायालय द्वारा दिया गया उक्त स्थगन आदेश (स्टे) **6 सप्ताह** के लिए था, जिसकी अवधि अगस्त 2025 में ही पूर्ण हो चुकी है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि स्टे की मियाद खत्म होने के बावजूद कर्मचारी को अब तक शाजापुर के लिए कार्यमुक्त (Relieve) नहीं किया गया है, जो कि नियमों के विरुद्ध है।
विकास यादव ने आयुक्त नगरीय प्रशासन भोपाल और संयुक्त संचालक उज्जैन को भेजे गए अपने पत्र में निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
1. **कार्यमुक्ति में देरी:** जब स्थगन आदेश की अवधि समाप्त हो चुकी है, तो 315 दिनों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कर्मचारी नीमच में किस आधार पर पदस्थ हैं?
2. **प्रशासनिक जवाबदेही:** पत्र में इस विलंब को 'प्रशासनिक शिथिलता' बताते हुए इसकी जांच की मांग की गई है।
3. **निष्पक्ष ऑडिट:** शिकायतकर्ता ने मांग की है कि इस अवधि के दौरान किए गए कार्यों का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए और नियमों की अनदेखी करने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।
#### **निष्कर्ष**
यह पूरा मामला अब उच्च अधिकारियों के संज्ञान में है। **मिशन मालवा न्यूज़** इस विषय पर पूरी तरह निष्पक्ष है और यह रिपोर्ट प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित है। अब देखना यह होगा कि नगरीय प्रशासन विभाग इन तकनीकी बिंदुओं पर क्या स्पष्टीकरण देता है या क्या कार्रवाई सुनिश्चित करता है।