नीमच मध्य प्रदेश। सरकारी अस्पतालों में लापरवाही और मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं, लेकिन नीमच जिले के जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जो सनसनीखेज मामला सामने आया है, उसने पूरे स्वास्थ्य महकमे की साख को तार-तार कर दिया है। यहाँ लैब स्टाफ का एक ऐसा कारनामा उजागर हुआ है जिसे देखकर हर कोई दंग है। जीरन सीएचसी में मरीजों की जांच किसी वैज्ञानिक तरीके से नहीं, बल्कि अंधा बांटे रेवड़ी की तर्ज पर मनगढ़ंत तरीके से की जा रही है। लैब स्टाफ ने बिना यूरिन टेस्ट किए ही सीधे फाइनल रिपोर्ट बनाकर मरीज के हाथ में थमा दी। मिशन मालवा न्यूज़ के रिपोर्टर समरथ सेन की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार यह सीधे तौर पर मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ और एक आपराधिक कृत्य है।
एक घंटे इंतजार के बाद मिला फर्जीवाड़ा का सबूत
मिली जानकारी के अनुसार, सोमवार को पालसोड़ा निवासी अनिल राठौर अपनी पत्नी के इलाज के लिए जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ आयुष चौहान ने मरीज की स्थिति को देखते हुए ब्लड और यूरिन टेस्ट यानी मूत्र जांच कराने की सलाह दी थी। डॉक्टर के पर्चे के बाद मरीज के परिजन सैंपल लेकर लैब पहुंचे और करीब एक घंटे तक अपनी बारी का इंतजार करते रहे। लेकिन जब लैब के अंदर का नजारा सामने आया, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। लैब स्टाफ ने यूरिन के सैंपल में जांच स्ट्रिप को डुबाना तक मुनासिब नहीं समझा और अंदर बैठे-बैठे ही कलम चलाकर मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार की और मरीज के अटेंडर को सौंप दी।
सतर्क मरीज ने मोबाइल कैमरे में कैद की जालसाजी, बगलें झांकता रहा स्टाफ
अस्पताल के ढर्रे से वाकिफ सजग नागरिक अनिल राठौर को शायद पहले ही किसी गड़बड़ी की आशंका थी। इसलिए वे गुपचुप तरीके से अपने मोबाइल से पूरे घटनाक्रम की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। जैसे ही बिना टेस्ट किए रिपोर्ट उनके हाथ में आई, अनिल ने सीधे लैब टेक्नीशियन और वहां मौजूद स्टाफ से तीखे सवाल दाग दिए। रंगे हाथों पकड़े जाने पर लेबोरेटरी के तीनों स्टाफ के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं। स्टाफ सवालों का जवाब देने के बजाय बगलें झांकने लगा और कैमरे से मुंह छिपाकर भागता नजर आया। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य विभाग की जमकर फजीहत करा रहा है।
जांच करवाता हूँ, अधिकारियों का वही रटा-रटाया सरकारी जुमला
इस बेहद गंभीर और आपराधिक लापरवाही के मामले में जब ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ विजय भारती को अवगत कराया गया और वीडियो के रूप में पुख्ता सबूत दिखाए गए, तो उन्होंने भी हमेशा की तरह वही रटा-रटाया सरकारी जुमला उगल दिया। बीएमओ ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है, मैं इसकी जांच करवाता हूँ। अब बड़ा सवाल यह है कि जब वीडियो में साफ तौर पर फर्जीवाड़ा लाइव कैद है, तो फिर किस बात की जांच का इंतजार किया जा रहा है? दोषियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
यक्ष प्रश्न, गलत रिपोर्ट से जान जाती तो जिम्मेदार कौन?
जीरन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लापरवाहियों का यह कोई पहला मामला नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहाँ मरीजों के स्वास्थ्य के साथ लगातार खिलवाड़ किया जा रहा है। सोचने वाली बात यह है कि यदि इस फर्जी रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर कोई गंभीर या गलत दवा लिख देते और मरीज की जान पर बन आती, तो उसकी मौत का जिम्मेदार कौन होता? क्या जिला स्वास्थ्य विभाग सोया हुआ है? क्या आला अधिकारी किसी बड़े हादसे के इंतजार में हैं, जिसके बाद ही उनकी नींद खुलेगी? सरकारी अस्पताल में गरीब जनता इस उम्मीद से आती है कि उन्हें मुफ्त और सही इलाज मिलेगा, लेकिन यहाँ तो जांच के नाम पर सिर्फ कागज रंगे जा रहे हैं।
चेत जाए प्रशासन, वरना झेलना होगा जनता का आक्रोश
ऐसा लगता है कि जिला स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से कुंभकर्णी नींद में सोया हुआ है। यदि समय रहते इस भ्रष्ट, लापरवाही और अमानवीय ढर्रे को नहीं सुधारा गया, तो आने वाले दिनों में स्वास्थ्य विभाग को जनता के भारी आक्रोश और उग्र आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। यह समाचार उन तमाम अधिकारियों के मुंह पर करारा तमाचा है जो एयर-कंडीशनर कमरों में बैठकर सब चंगा सी का दावा करते हैं। अब देखना यह है कि कैमरे पर कैद इस लाइव फर्जीवाड़े के बाद दोषियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई होती है या फिर हर बार की तरह इस मामले को भी लीपापोती करके ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। जनता जवाब मांग रही है।