शनिवार को आयुष्मान आरोग्य मंदिर जमुनिया कला के औषधालय परिसर में आयुष विभाग द्वारा एक विशेष 'योग एवं स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम' का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और स्थानीय क्षेत्र के लोगों को दवाइयों के बजाय प्राकृतिक तरीके से स्वस्थ रहने के प्रति जागरूक करना था।
विशेषज्ञों की देखरेख में हुआ योगाभ्यास
इस स्वास्थ्य शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यहाँ लोगों को सिर्फ योग के फायदे बताए ही नहीं गए, बल्कि विशेषज्ञों की मौजूदगी में लाइव अभ्यास भी कराया गया। शिविर में पहुंचे लाभार्थियों को शारीरिक और मानसिक संतुलन को बेहतर बनाने वाले प्रमुख आसनों का अभ्यास कराया गया, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
- ताड़ासन और वृक्षासन (शारीरिक संतुलन और एकाग्रता के लिए)
- भुजंगासन (रीढ़ की हड्डी और मजबूती के लिए)
- अनुलोम-विलोम एवं कपालभाति (श्वसन तंत्र और मानसिक शांति के लिए)
'सर्वे भवन्तु सुखिनः' के संदेश से गूंजा परिसर
कार्यक्रम के दौरान भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र "सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।" (अर्थात सभी सुखी हों, सभी निरोग हों) का संकल्प लिया गया। विशेषज्ञों ने उपस्थित जनसमुदाय को समझाया कि योग को केवल एक दिन का आयोजन न मानकर अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना कितना जरूरी है।
इस मुहिम का असर भी देखने को मिला, जहाँ 25 से अधिक लाभार्थियों ने न सिर्फ इस कैंप में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि अपनी सेहत को बेहतर बनाने के टिप्स भी सीखे।
इनकी रही सराहनीय भूमिका
इस पूरे जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने और निष्पक्ष रूप से जन-जन तक स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने में स्थानीय स्वास्थ्य टीम की बड़ी भूमिका रही। कार्यक्रम में डॉ. विमला पाटीदार, श्रीमती भावना बैरागी, श्री विनीत सोनी, श्री आनंद शर्मा एवं श्रीमती श्वेता जोशी ने अपना विशेष और सराहनीय योगदान दिया।